देवा तुझ्या  द्वारी आलो
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४ डिसेंबर, २०११

मन का मानव !

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कुछ भी नही असंभव जगमे , सब संभव हो सकता है कार्य हेतु यदि कमर बांधलो तो सब कुछ हो सकता है ! बंधन - बंधन क्या करते हो , बंध...
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अमोल केळकर
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